कोठी नंबर छप्पन
गाँव से आई भागवंती पूछ-ताछ कर जब तक आनंद नगर पहुँची, सूर्य अग्नि-पिंड बन कर उसके सिर पर लटक रहा था। उसके भानजे ने शहर के इसी मुहल्ले में पिछले दिनों नई कोठी बनाई थी। उसी से मिलने आई थी भागवंती। गरमी बढ़ गई थी और गलियाँ सूनी पड़ी थीं। भागवंती साठ वर्ष...
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ਸ਼ਿਆਮ ਸੁੰਦਰ ਅਗਰਵਾਲ/श्याम सुन्दर अग्रवाल
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[02 Jun 2009 08:04 AM]



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