एक गीत : तुम बिना पढ़े ....

गीत  ग़ज़ल  औ गीतिका तुम बिना पढ़े लौटा दी मेरी आत्मकथा 'आवरण' देख पुस्तक पढ़ने की आदी हो तुम फूलों का रंगों से मोल लगाती हो मैं भीनी-भीनी खुशबू का आभारी हूँ तुम सजी-सजाई दुकानों की ग्राहक हो मैं प्यार बेचता गली-गली व्यापारी हूँ तुम सुन न सकोगी मेरी अग्नि-शिखा गीतें तुम र... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
views
21
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
1
[11 Jun 2009 11:42 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix