कहाँ जाई, का करि – तुलसीदास

सृजन और सरोकार कहाँ जाई, का करि – तुलसीदास ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उपमाओं के पी... [पूरी पोस्ट]
writer रवि कुमार, रावतभाटा
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[11 Jun 2009 11:22 AM]

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