उनीनी आँखों का सपना बन.........

swati : रेगिस्तान में पड़ रही है बर्फ उनींदी आँखों का सपना बन तुम अब तक मेरी पलकों में उलझें हो.... हर सुबह मलती रही जग की धूप चुभती रही पर किरचें हैं कि धुलती नहीं नैनों में काजल का भ्रम बना हुआ है अब तक विरह की श्यामलता टिकी है बिछा हो ज्यों हर पथ औ इसी पथ पर प्रिय रुकी हुईं हूँ उसी मो... [पूरी पोस्ट]
writer swati
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[11 Jun 2009 08:52 AM]

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