*** दिशाएँ बनी अग्नि की लहरें.. ***

Jayant Chaudhary दिशाएँ बनी अग्नि की लहरें, वायु के कण भी थे सहमें सहमें... बहती थी मृत्यु हवाओं में, तब कूद पड़ा था वो उस रण में... मैं पीछे ना हटूँ, उसका प्रण था, माँ पर न्यौछावर कण कण था... हौसला बढ़ता उसका हर पग था, भीषण होता जितना भी रण था... विस्मृत कर वो फेरों... [पूरी पोस्ट]
writer Jayant Chaudhary
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[11 Jun 2009 00:31 AM]

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