दोस्तों की याद में

पहलू कल शाम घर लौटते हुए एक मोड़ पर स्कूटर जवाब दे गया। मकेनिक खोज कर बनवाने बैठा, तभी फोन की घंटी बजी। अनजान नंबर। फोन उठाया तो किसी ने पूछा, मिश्रा जी का नंबर है? मैंने कहा, जी मैं चंद्रभूषण बोल रहा हूं, आपको किससे बात करनी है? फिर सीधे- अरे साले मैं नी... [पूरी पोस्ट]
writer चंद्रभूषण
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[10 Jun 2009 10:46 AM]

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