चैराहे नहीं रहे अब वैसे
चैराहे नहीं रहे अब वैसे पहले से अल्हड, ठहरे-ठहरे से हर ओर मची है भागमभाग आदमी भाग रहा है, सडकें भाग रही हैं पीछे-पीछे भाग रहा है चैराहा । नेता जी को जरूरत नहीं पड़ती, आने की अब चैराहे पर कि जनता से जुड़ने की जरूरत ही नहीं रही सियासत के रंग-ढंग दोनों ही...
[पूरी पोस्ट]
kaustubh
19
3
0
3
1
[10 Jun 2009 09:15 AM]



Shuffle








