सीमाबद्ध

किस्सा-कहानी अरे...........क्या कर रहे हो?' जब तक मैं कुछ समझूं, तब तक सुनील मुझे एक प्यारी सी साडी में लपेट चुके थे। और मैं भी अवश, मंत्रमुग्ध सी उसमें लिपटती जा रही थी। 'अब कुछ समझ में आया की मैं क्या कर रहा था?' 'आया जनाब , लेकिन अपने स्वेटर पर तो रहम किया होत... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना अवस्थी दुबे
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[10 Jun 2009 08:20 AM]

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