चलो, सबसे प्यार करें

हिमाल : अपना-पहाड़ हम कितना कुछ रोज देखते हैं। लेकिन सबकुछ नज़रअंदाज़ करते रहते हैं। छोटी-छोटी बातें बड़े अर्थ रखती हैं। लेकिन क्या हम समझ पाते हैं ? शायद नहीं। हम अपनी ही दुनिया में मस्त हैं। हमें अपने दुखों और मुश्किलों से फुरसत नहीं। हमें अपनी खुशियों की परवाह है...... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट
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[09 Jun 2009 22:55 PM]

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