शहरों का बच्चा है

लम्हें जिन्दगी के रंग महौब्बत का है ताउम्र चमकता रहता है । इस नगरी में जादु है गुलाल बरसता रहता है । क्या तुम से मिलता है ? एक दिवाना भटकता रहता है । बचपन जिसके साथ है वो हर पल चहकता रहता है । शाख से गिरता है और भटकता रहता है । शहरों का बच्चा है माँ को तरसता रहता है ।... [पूरी पोस्ट]
writer hemjyotsana "Deep"
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[09 Jun 2009 20:41 PM]

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