आदमी हो आदमी की शान रखना तुम
रायपुर से स्नेही स्वजन श्री गिरीश पंकज जी ने आज एक कविता मेल की, दिल के करीब लगी, इसलिए यहां आपके सबके लिए रख रहा हूं - हो मुसीबत लाख पर ये ध्यान रखना तुम, मन को भीतर से बहुत बलवान रखना तुम। बहुत संभव है बना दे भीड़ तुमको देवता, किंतु मन में एक अदद इ...
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पंकज शुक्ल
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[09 Jun 2009 13:22 PM]



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