मातृदेवो भव
मातृदेवो भव *** असल में यह एक लोककथा है और लोककथा की शक्ति यह होती है कि जीवन का सार अपने अनुभव के आधार पर लोक उस में भरता है। इन कथाओं की प्रभविष्णुता का मूल स्रोत ही इनकी सामाजिक भूमिका में निहित होता है व जो मूलत: लोकमंगल के लिए ही रची जाती हैं। क...
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कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[09 Jun 2009 09:53 AM]



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