क़ाफिले दोस्तों के

कोलाहल क़ाफिले दोस्तों के क्या देंगे, घाव पर घाव इक नया देंगे । इस भरोसे पे चोट खाए चलो, ज़ख्म अपने ही हौसला देंगे । क़ाफिले दोस्तों के क्या देंगे- - - वो मसाहत का दम जो भरते हैं जान हम पल लुटाए फिरते हैं खुद ही तोड़ेंगे क़यामत इक दिन हंस के सूली हमे चढ़ा देंगे ।... [पूरी पोस्ट]
writer kaustubh
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[09 Jun 2009 09:25 AM]

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