चल दिया बिना कुछ कहे . . .
मृत्यु हमेशा इंसान के साथ-साथ रहती है, वह इंसान नहीं जानता की कब वह उसे अपनों से दूर कर देगी, कवि अक्सर अपनी कल्पनाओं में, या एक आम व्यक्ति जो लेखक नहीं भी होता वह भी उसका जिक्र कभी न कभी कर ही देता है, परन्तु यह जब आती है तो किसी को एक पल का मौ...
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kuchh padhna hai
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[09 Jun 2009 07:06 AM]



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