हबीब दा से आखिरी बातचीत

नई इबारतें वालिद की वसीयत पूरी करने का सुकून यकीनन पहाड़ टूटा है। हकीकत इतनी ही ठोस और बेरहम होती है। सोमवार की सुबह सूरज अंधियारा लेकर उगा था। हबीब साहब के इंतकाल के बाद वक्त थम गया। हंसी रुक गई। उम्मीद ठहर गई। अंधेरा छटा तो हौसला मुस्कुराया, कि लोक की आस्था मे... [पूरी पोस्ट]
writer सचिन ..........
views
39
upvote
7
downvote
0
rating
7
comments
7
[09 Jun 2009 03:15 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix