मिट्टी और जंगल
वह मिट्टी थी। उस पर एक जंगल उगा था। जंगल जिसकी जड़ें बहुत भीतर उतर कर उसकी रूह को टटोलती थी। कहीं गहरे से नमी खोज लाती थी। ऐसी नमी जिससे जंगल पनपता था। फूल खिलते थे...फल लगते थे। हरियाली,वसंत,पँछी,पखेरू...। वह देना जानती थी। हल्की बारिश में सौंधी खुश...
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Beji
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[09 Jun 2009 02:13 AM]



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