मेरी कलम के मुझ पर आरोप
आज कुछ लिखने बैठा तो अचानक मेरी कलम रुक गई, कहा कि बस, अब मैं और ना सह पाऊँगीं, बहुत समय से तुम्हारे दिखावे का साथ दे रही हूँ, अब मैं सबको तुम्हारी असलियत बताऊँगीं, खुद को कवि कहते हो, पर इसका मतलब तक तुम नहीं जानते, सबकी भावनाएँ समझने का दावा करते ह...
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Gurnam Singh Sodhi
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[09 Jun 2009 01:05 AM]



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