अब हबीब तनवीर का नया थियेटर कौन बनाएगा?
तुने कहा न था के मैं कस्ती पे बोझ हूँ , चेहरे को अब न ढांप मुझे डूबते भी देख -शकेब जलाली ठीक एसा ही कह रही थी वे बंद आँखे जब लोग उनका अन्तिम दर्शन करने आ रहे थे। क्या लगता? क्या उम्र के क़दमों ने साथ छोड़ दिया था इसलिए हबीब साहब हमसे दूर चले गए। या फ़ि...
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भीमसिंह मीणा
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[08 Jun 2009 15:00 PM]



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