एक स्याह और शोकाकुल तारीख : हबीब तनवीर का जाना

UDAY PRAKASH १९८२ : जब हबीब साहब बेरसराय में पड़ोसी थे. २००८ : भोपाल में जब उन्होंने 'वनमाली सम्मान' दिया हम में से हज़ारों लोग आज उदास होंगे. हबीब साहब का जाना एक जलती हुई रौशन कंदील का अचानक बुझ जाना है. उन्हें अभी कई बरस और रहना चाहिए था. हमारे बीच. उनका जाना सि... [पूरी पोस्ट]
writer Uday Prakash
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[08 Jun 2009 08:51 AM]

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