प्रेम जनमेजय

प्रेम जनमेजय तपनजब जून का महीना आता हैअपने प्राकतिक रूप मेंअपने पूर्ण अस्तित्व के साथसपरिपवार,दिल्ली में लोग तपते या जहां कहीं भी दिल्ली हैलोग तपते हैंभीष्ण गर्मी की तपन से ।लोग तपते हैंमैं भी तपता हूंपर, एक और अगन से।ये अगन है अभाव की ये अगन है खालीपन कीये अगन ह... [पूरी पोस्ट]
writer प्रेम जनमेजय
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[08 Jun 2009 03:38 AM]

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