एक गज़ल : जब से तुम से मिली....
जब से तुम से मिली जिन्दगी सांस लेने लगी जिन्दगी रूह अपनी निखरने लगी आईने-सी लगी जिन्दगी कितने सपने लगी देखने चार दिन की बची जिन्दगी उनके दीदार की जुस्तजू मेरी दीवानगी जिन्दगी अब न जाएं यहाँ से कहीं छोड़ तेरी गली ज़िन्दगी यह तो है इश्क की इब्तिदा बेखुद...
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आनन्द पाठक
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[08 Jun 2009 01:25 AM]



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