कहीं बात आम न हो जाए --
सागर की बादलों से हुई खामोश गुफ्तगू को एक लहर ने सुना मन ही मन कुछ गुना और यह बात शहर से कहने को चुना वह था बेहद भावविभोर तभी तो करता हुआ शोर भागा किनारे की ओर --- सागर को हुआ संकोच कहीं बात आम न हो जाए वह बिना बात के बदनाम न हो जाए उसने, उसे रोकने क...
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M VERMA
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[07 Jun 2009 08:50 AM]



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