फरीद के श्लोक - ३५
फरीदा पिछल राति न जागिउरि जीवदड़े मुइउरि॥जे तै रबु विसारिआ त रबि न विसरिउरि॥१०७॥फरीदा कंतु रंगावला वडा वेमुरताजु॥अलर सेती रतिआ ऐहु सचावां साजु॥१०८॥फरीदा दुखु सुखु इक करि दिल ते लाहि विकारु॥अलर भावै सो भला तां लभी दरबारु॥१०९॥फरीद जी कहते हैं कि यदि तू...
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परमजीत बाली
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[07 Jun 2009 03:27 AM]



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