तलाश
ऐसे लगता है जैसे किसी राह की तलाश में जीवन की चेतना पाई हो। और रास्तों के पड़ावों में ना रास्ता याद रहा ना तलाश। जैसे किसी सपने के उगने पर...जागी आँखों के सच धुँधले से पड़ जाते हैं। और सपने के ही मायने दिखाई देते हैं। ऐसे बँधता है मन लगावों के तारों...
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Beji
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[07 Jun 2009 00:47 AM]



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