Jayant Chaudhary

Jayant Chaudhary एक नया प्रयोग .... पिछली बार इसी विषय पर एक कविता लिखी थी ... अब उसी को दूसरे रूप में लिखा है ॥ आशा करता हूँ अच्छा लगेगा॥) वो बिस्तर पर , एक चादर सी बिछी होगी , एक निर्जीव , शरीर सी पड़ी होगी , तन के कोलाहल से , मन की दूरी रखती होगी , अपने मन में उठती... [पूरी पोस्ट]
writer Jayant Chaudhary
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[06 Jun 2009 10:42 AM]

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