Jayant Chaudhary
एक नया प्रयोग .... पिछली बार इसी विषय पर एक कविता लिखी थी ... अब उसी को दूसरे रूप में लिखा है ॥ आशा करता हूँ अच्छा लगेगा॥) वो बिस्तर पर , एक चादर सी बिछी होगी , एक निर्जीव , शरीर सी पड़ी होगी , तन के कोलाहल से , मन की दूरी रखती होगी , अपने मन में उठती...
[पूरी पोस्ट]
Jayant Chaudhary
22
2
0
2
8
[06 Jun 2009 10:42 AM]



Shuffle








