बारिश:दो नजरिये

सोचा ना था.... कल शाम बारिश की पहली फुहार पड़ी...हवा के साथ ही मन भी शीतल हो गया.सभी अब गर्मी की तपिश से आज़ादी पाने के बारे में सोचने लगे.अब चारों ओर हरियाली दिखेगी.तेज़ बरसती बारिश से जुडा कोई न कोई किस्सा तो सभी के पास हैं,जो अब फिर से चाय-पकोडों के बीच सुनाये जाय... [पूरी पोस्ट]
writer Neha
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[06 Jun 2009 07:58 AM]

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