मसूरी: पास का सुहाना ढोल........
बारह साल पहले छात्र-जीवन की कंजूसी के तहत पहाड़ी यात्रा के सफर पर जब मैं चला था, तब इस दौरान बस-यात्रा और कई जगह मीलों पैदल चलने की मजबूरी ने मसूरी यात्रा को नागवार बना दिया था। तभी मैंने तय किया था कि अब बस की बेबस-यात्रा की बजाए कार से आऊँगा, बश...
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जितेन्द़ भगत
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[06 Jun 2009 06:21 AM]



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