चकवे जैसी प्रीत मेरी
चाँद के जैसी सूरत तेरी चकवे जैसी प्रीत मेरी जोगी जैसे फिरूं भटकता इश्क कहे ये रीत मेरी ! शमां हुस्न की परवाने को ले बाँहों में जला रही है हुस्न कहे, ले हार गया तू इश्क कहे ये जीत मेरी ! तेरे प्यार की एक बूँद में जीवन डोर बंधी मेरी मैं सदियों का प्यास...
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निर्झर'नीर
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[06 Jun 2009 06:11 AM]



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