इश्क वफ़ा की सीढियाँ चढ़ कर
इश्क वफ़ा की सीढियाँ चढ़ कर चुन लाये कुछ उजली किरणें हुस्न के माथे ताज सजे फ़िर जन्मों का सारा दुःख भूले रात की चाँदनी वफ़ा के दम पर दिन का सेहरा इश्क के सर पर इश्क जो चढ़ता सूरज सा ही कैसे अपने आप को भूले वफ़ा की चाहत है सबको ही चाहत है पर वफ़ा नहीं है स...
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शारदा अरोरा
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[06 Jun 2009 05:48 AM]



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