कुछ बातें पेंचीदा सी

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का कल शेल्फ से किताबें निकालते वक़्त , चीटियों की लम्बी कतार देखी ............. चली जा रहीं थी ....... चौकन्नी , तेज़ रफ़्तार ... गंतव्य की ओर .... उनमें से कुछ ... लुढकी , गिर पड़ी ........ गिरने वाली को , किसी ने न देखा .. न सहारा दिया ... जो गिरी थी ..... [पूरी पोस्ट]
writer Priya
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[06 Jun 2009 04:06 AM]

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