तेरे मुज़रिम
बड़े साहब से साडी नफ़रत ,अपनी असुरक्षा ,भय .....प्रतिशोध .....सब 'मथ' कर मैंने उसके शरीर में उडेल दिए. ..दीवार की छिपकली सी वह मुझसे चिपकी थी .......
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naturica
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[05 Jun 2009 23:57 PM]



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