हरा ही हरा… पर गाय ने नहीं चरा !? :(

टूटी-फूटी सत्यार्थ के मुण्डन के उद्देश्य से गाँव जाना हुआ। करीब दस दिनों के बाद घर वापस आकर देख रही हूँ कि आस-पास काफी कुछ बदल गया है। बेटे के सिर पर उग आयी फसल तो परम्परा के अनुसार कटवा- छँटवा कर ‘कोट माई’ के स्थान पर चढ़वा दिया। लेकिन इस अवधि में यहाँ घर के च... [पूरी पोस्ट]
writer रचना त्रिपाठी
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[05 Jun 2009 19:28 PM]

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