हास्य क्षणिका...
हास्यिका : हो जाए कुछ हल्का- फुल्का मिर्च-मसला बैठे- ठाले 'आनंद' जी ने क्या लिख डाला सावुनी दोहे 'चारित्रिक व्यक्तित्व पर जो कीचड लग जाय 'सर्फ़-अल्ट्रा' से धोइए श्वेत-धवल हो जाय साबुन मल-मल जग मुआ धवल वस्त्र न होय एक हाथ 'ओ0के०' मल्यौ धवल-धवल ही होय...
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आनन्द पाठक
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[05 Jun 2009 12:14 PM]



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