चौराहे पर लाश ---
उसकी लाश चौराहे पर पड़ी हैं गिद्धों की निगाहें उसपर गड़ी हैं सड़ांध -- बदबू -- रक्त की धार -- कोई नहीं जानता किसने उसको मारा हर तमाशबीन के हाथ में बंद है एक नारा सभी तज़बीज़ रहे हैं कब मुट्ठी खोलने का वक्त आए! सब इस ताक में हैं उसका हाथ सबसे ऊँचा लहराए!...
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M VERMA
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[05 Jun 2009 09:20 AM]



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