सोती हुई बिटिया को देखकर
अभी-अभी हुलसकर सोई हैं इन साँसों में स्वरलहरियां अभी-अभी इन होठों में खिली है एक ताज़ा कविता अभी-अभी उगा है इन आंखों में नीला चाँद अभी-अभी मिला है मेरी उम्मीदों को एक मज़बूत दरख़्त...
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अशोक कुमार पाण्डेय
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[05 Jun 2009 07:35 AM]



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