मत काटो मेरे यौवन को
मैं हूं एक वृक्ष देता हूं लोगों को छांव मुझपर बसते हैं पंछी बनाकर अपना गांव चाह नहीं मेरी कुछ भी है सिर्फ चाहता हरियाली सर्दी, गर्मी हर मौसम में मेरा जीवन खुशहाली लेकिन एक दर्द है मुझको मत काटो मेरे यौवन को इतना अहसान करो मुझ पर भी बख्शो मेरे जीवन को...
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anupam mishra
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[05 Jun 2009 07:08 AM]



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