ज़रा सा शक़

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... एक छोटी सी नादानी हम हर बार करते हैं, दिल दुखाते हैं उनका, जो हम पर ऐतबार करते हैं, हर रिश्ता टिका होता है विश्वास की बुनियाद पर, और हपने शक से उसी नीँव पर हम वार करते हैं, लाख दुहाई देते हैं रिश्तों में गहराई की, इक दूसरे को समझाने का दावा तो हर बार... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[05 Jun 2009 00:34 AM]

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