** आख़िर वो भी एक माँ थी.....** (~जयंत)

Jayant Chaudhary उस चादर की तरह , वों भी सिमटी रहती थी , चादर की सलवटों के जैसे , उसके जीवन में तहें रहती थी .... उस चादर की तरह , हर दिन कुचली जाती थी , चादर की चुप्पी के जैसे , उसकी जुबान भी बंद रहती थी ... उस चादर की तरह , यहाँ वहाँ फेंकी जाती थी , लाचार चादर के ह... [पूरी पोस्ट]
writer Jayant Chaudhary
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[04 Jun 2009 23:02 PM]

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