आईनों पर कहर ..
उजाड़कर बस्ती शोक मनाते हैं कत्ल करके फिर आंसू बहाते हैं . गुमशुदा तलाश में पढ़कर नाम ख़ुद ही को लोग ढूढ़ने जाते हैं . ख़ुद के चेहरों पर लगा कर दाग आईनों पर देखिये कहर ढाते हैं . इस बस्ती से बेखौफ न गुज़रिये बात-बात पे लोग खंज़र उठाते हैं . मज़हबी शिक...
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Razia
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[04 Jun 2009 21:27 PM]



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