चंदू मैंने सपना देखा

अपनीबात... क्रांतिकारी चेतना के कवि बाबा नागार्जुन की कवितायेँ एक ओर जहाँ सहजभाव की द्योतक हैं वहीं आम आदमी की पीड़ा का प्रतिनिधित्त्व भी करती हैं। प्रस्तुत है बाबा की एक चर्चित कविता "चंदू मैंने सपना देखा" चंदू मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटा चंदू मै... [पूरी पोस्ट]
writer आशेन्द्र सिंह
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[04 Jun 2009 12:27 PM]

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