अपहरण का ग्रहण - कब छूटेगा दाग

दिल से दिल की बात बस और ट्रेन के सफर में करीब 38 घंटे बिताने के कारण काफी थकान हो गई थी, सो बिस्तर पर जाते ही गहरी नींद की आगोश में समा गया। सुबह करीब छह बजे नींद खुली तो सामने रखे हिंदुस्तान अखबार के मुख्य शीर्षक -बेटा तो नहीं, लाश मिली- ने विचलित कर दिया। समाचार के... [पूरी पोस्ट]
writer manglam
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[04 Jun 2009 09:47 AM]

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