मरण आएगा जिस दिन द्वार …..
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का एक गीत (बांग्ला से अनुवाद : प्रयाग शुक्ल) मरण आएगा जिस दिन द्वार मरण आएगा जिस दिन द्वार
उसे तुम दोगे क्या उपहार । रखूंगा उसके सम्मुख आन
कि, छलछल करते अपने प्राण
विदा में दूंगा उस पर वार –
मरण आएगा जिस दिन द्वार ! शरत अनगिन...
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कविताएं/Poemsरवीन्द्रनाथ ठाकुर
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[04 Jun 2009 08:35 AM]



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