खबरी की पांच छहनिकाएं
मुझे बहुत ज्यादा छंद ज्ञान नहीं है- छणिकाओं में पंक्तियों की सीमा का खयाल नहीं होता पर मैंने ये क्षणिकाएं छह सूक्तियों के दायरे में लिखी हैं- सो इन्हें एक नाम छहनिकाएं दिया है, स्वीकार हो तो जरूर बताएं-) दीवार पर गढ़ी कील, दिल-दीवार, बाकी तुम..! बांस...
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देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
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[03 Jun 2009 19:30 PM]



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