आखिर बेच डाली छह सौ किलो रद्दी

shuruwat : जिंदगी सिखाती है कुछ कई शौक भारी पड़ जाते है। ऐसा ही है मेरा और अखबार का रिश्ता। खाना मिले न मिले अखबार जरूर हो। मेरे इस प्रेम के चक्कर में मेरे बिस्तर के चारों और हमेशा अखबारों का ढेर होता है। मेरे सारे परिचित और दोस्त इससे वाकिफ है। हाल तक मैं जिस मकान में रहता था वहां... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव जैन Rajeev Jain

जिंदगी लाइव

views
27
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
6
[03 Jun 2009 16:49 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix