विजयदेवनारायण साही की एक कविता

अनहद नाद प्रार्थना : गुरु कबीरदास के लिए परम गुरु दो तो ऐसी विनम्रता दो कि अंतहीन सहानुभूति की वाणी बोल सकूँ और यह अंतहीन सहानुभूति पाखंड न लगे । दो तो ऐसा कलेजा दो कि अपमान, महत्वाकांक्षा और भूख की गांठों में मरोड़े हुए उन लोगों का माथा सहला सकूँ और इसका डर न... [पूरी पोस्ट]
writer PRIYANKAR

कविताएं/Poems

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[03 Jun 2009 09:37 AM]

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