प्रेम ही बंधन ...प्रेम ही मुक्ति
तूने इश्क भी किया तो कुछ इस तरह जैसे इश्क मेंह है और तुम्हे भीगने का डर है !" हर अतीत एक वो डायरी का पुराना पन्ना है ....जिस को हर दिल अजीज यदा कदा पलटता है और उदास हो जाता है .कई बार उस से कुछ लफ्ज़ छिटक कर यूँ बिखर जाते हैं ...कोई नाम उन में चमक जा...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[03 Jun 2009 07:41 AM]



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