कविता की किताब अब मेज़ पर

UDAY PRAKASH आखिर परसों 'एक भाषा हुआ करती है' की पांच लेखकीय प्रतियां (Author's complimentary copies) कूरियर सर्विस से मिल गयीं। 'सुनो कारीगर', अबूतर कबूतर' और ' रात में हारमोनियम' के बाद यह मेरा चौथा कविता संग्रह है। पहला कविता संग्रह 'सुनो कारीगर' पहली बार १९८०... [पूरी पोस्ट]
writer Uday Prakash
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[03 Jun 2009 07:40 AM]

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