जैसी बची है वैसी की वैसी बचा लो रे दुनिया..

मुसीबतों में भी लोगो को आशा की किरण नज़र आ जाती है.. देखियेना हमारे घर के सामने करीब सौ सालो से जिन्दा एक महिला की मृत्युहो गयी.. पता चला बीमार थी लेकिन मौत नहीं आ रही थी तो घर वालोने उसे मुक्ति देने के लिए ४६ डिग्री टेम्प्रेचर में बिना पंखे वाले एक क... [पूरी पोस्ट]
writer कुश
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[03 Jun 2009 07:28 AM]

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