जैसी बची है वैसी की वैसी बचा लो रे दुनिया..
मुसीबतों में भी लोगो को आशा की किरण नज़र आ जाती है.. देखियेना हमारे घर के सामने करीब सौ सालो से जिन्दा एक महिला की मृत्युहो गयी.. पता चला बीमार थी लेकिन मौत नहीं आ रही थी तो घर वालोने उसे मुक्ति देने के लिए ४६ डिग्री टेम्प्रेचर में बिना पंखे वाले एक क...
[पूरी पोस्ट]
कुश
62
8
0
8
25
[03 Jun 2009 07:28 AM]



Shuffle








