vikshubdha

vikshubdha विरोध की आग में धूं धूं जलती रेलगाडी के डिब्बों को देख एक अजीब सी कसमसाहट होती रही...रेलगाडी अब फलां स्टेशन पर नहीं रुकेगी तो इसे फूंक ही डालो ! ना रहेगी गाडी ऑर न ही बचेगा उसके चलने -रुकने का कोई सवाल ...सारी परेशानी ख़त्म ! वाह क्या सोच है ! लेकिन... [पूरी पोस्ट]
writer विक्षुब्ध सागर
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[03 Jun 2009 07:07 AM]

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