बंबई पहुंचे अफलातून बनारसी: ब्लॉगर-मिलन
तारीख तो याद नहीं है पर मई के आखिरी सप्ताह में किसी दिन मोबाइल-फोन की घंटी बजी तो नंबर वसई की ओर का नज़र आया । उधर से आवाज़ आई--'जी मैं अफलातून बोल रहा हूं ।' ज़ाहिर है कि अफ़लातून जी मुंबई आए चुके थे और इससे पहले उन्होंने बाक़ायदा 'मेल' पर सभी को...
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yunus
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[03 Jun 2009 01:49 AM]



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